50 लाख के मुआवज़े का एक हिस्सा दान करेंगी बिलकीस बानो
अपने पति के बगल में बैठी, कभी हिंदी तो कभी गुजराती में बोलती बिलकीस बानो. आंसुओं से उनका गला बार-बार रूंध रहा था इसलिए वो रुक-रुककर बोल रही थीं. बीच-बीच में उनके पति याक़ूब उनके कंधे पर हाथ फेरते, उनका हौसला बढ़ाते. साल 2002 में गुजरात दंगों के दौरान सामूहिक बलात्कार और अपने परिवार के 14 लोगों की हत्या देखने वाली बिलकीस बानो को 17 साल बाद सुप्रीम कोर्ट से इंसाफ़ मिला है. शीर्ष अदालत ने गुजरात सरकार को आदेश दिया है कि वो बिलकीस को मुआवज़े के तौर पर 50 लाख रुपये, उनकी पसंद की जगह पर एक घर और एक सरकारी नौकरी दे. अदालत के आदेश के बाद बिलकीस और उनके पति ने दिल्ली के प्रेस क्लब में मीडिया से बात की. बिलक़ीस ने कहा कि वो मुआवज़े का एक हिस्सा यौन हिंसा की शिकार महिलाओं और उनके बच्चों के लिए दान करना चाहती हैं. बिलकीस ने कहा कि वो अपनी बेटी के वकील बनने का सपना पूरा होते देखना चाहती हैं. उन्होंने कहा, ''एक पीड़िता के रूप में मैंने अपने सारे सपनों को मार दिया है. एक दोषमुक्त और जीवित बचे हुए व्यक्ति के रूप में अब उनकी कोई सीमा नहीं है और मेरे अधिकतर सपने मेरे और मेरे बच्चों के...