आधे दर्जन देश मिलकर भी क़तर को क्यों नहीं झुका पाए

शक्तिशाली और प्रतिद्वंद्वी पड़ोसी सऊदी अरब की द्वीप बना देने की धमकी, पूरी तरह से आर्थिक नाकेबंदी और अपने हवाई क्षेत्रों पर भी पूरी तरह से पाबंदी के बावजूद क़तर कमज़ोर क्यों नहीं पड़ा? दूसरा सवाल यह कि सऊदी की कोई भी रणनीति क़तर को झुका क्यों नहीं पाई?

इस दौरान क़तर न केवल संपन्न हुआ है बल्कि उसने मानवाधिकार के रिकॉर्ड को भी ठीक किया है. 25 लाख की आबादी वाले इस छोटे से देश ने तेल निर्यातक देशों के समूह ओपेक से बाहर निकलने की घोषणा सऊदी को बैकफुट पर ला दिया है.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार क़तर की अर्थव्यवस्था 2.6 फ़ीसदी की वृद्धि दर से आगे बढ़ रही है जबकि 2017 में यह वृद्धि दर 2.1 फ़ीसदी थी. यहां तक कि मुल्क के राजस्व घाटे में 2016 की तुलना में कमी आई है. फ़ोर्ब्स के अनुसार क़तर का विदेशी मुद्रा भंडार 2.9 अरब डॉलर से 17 अरब डॉलर तक पहुंच गया.

क़तर के ख़िलाफ़ सऊदी अरब के नेतृत्व में आधे दर्जन देश हैं फिर भी ये झुकाने में नाकाम रहे.

क़तर दुनिया के मानचित्र पर आकार में बहुत छोटा सा देश है, जिसका क्षेत्रफल महज 11,437 वर्ग किलोमीटर है जबकि आबादी केवल 25 लाख. इनमें भी 90 फ़ीसदी प्रवासी हैं.

ये वो देश है जिस पर उसके पड़ोसी और ताक़तवर मुल्क सऊदी अरब और इसके सहयोगी देशों बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और मिस्र ने आर्थिक और राजनयिक प्रतिबंध लगा रखे हैं.

18 महीने बाद भी फ़िलहाल किसी समाधान की कोई उम्मीद नज़र नहीं आ रही.

सोमवार को क़तर ने ओपेक से अलग होने की घोषणा की थी और अब संभावना जताई जा रही है कि वो गल्फ़ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) यानी खाड़ी सहयोग परिषद से भी अलग हो सकता है.

जीसीसी की रविवार यानी नौ दिसंबर से रियाद में बैठक होने वाली है.

खाड़ी देशों पर नज़र रखने वाले जानकारों के मुताबिक क़तर यदि ऐसा करता है तो उस पर नकेल कसने की तमाम कोशिशों में जुटे सऊदी अरब को न केवल खीझ होगी बल्कि इससे वो ख़ासा परेशान भी होगा क्योंकि पिछले 18 महीने से उसने इस छोटे से मुल्क के चारों ओर आर्थिक और राजनयिक नाकेबंदी कर रखी है.

Comments

Popular posts from this blog

香港示威蔓延至澳洲:“我感觉受到中国学生的审查”

США опубликовали снимки нефтяных объектов в Саудовской Аравии

瑞幸咖啡遭遇做空 疫情危机下中概股受到的放大镜式狙击